Posts

Showing posts from February 23, 2025

समय का सफर

सफर में भी मकां में भी शुकूं में भी परेशां भी  उदासी का सबब तुमसे मंजिल की बहर तुमसे खोना और पाना भी संकल्पों का समर्पण भी त्यागी हर बिरासत है अपनाया उसूं भी तु भेदों से विभेदों तक छुपा भी जो खुला भी सब समय की एक सीमा है कुछ दिन बस ठहर तु सब बादल जो वो बरसा है नदी फिर जो ऊफानों पर मेरे समुन्दर की लहरें हैं तु ही बस एक नाविक है