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राह

राह चले पर चले कहाँ मंजिल ठहरी मिली कहाँ मैं गाढ गधेरा पहाडों से निकला तो फिर रूका कहाँ सपने बुने पर चुने कहाँ लक्ष्य सधे जो मिले कहाँ मैं 'ढुंगा माटा' पहाडों का खिसका तो फिर थमा कहाँ लोग मिले पर साथ कहाँ समूहों की पहचान कहाँ मैं असहज मोड पहाडों का जमा रहा फिर डिगा कहाँ

लौटना पडेगा

दौड आया मैं मीलों सफर साथिया जो मिली ना मिली तो ना मिली राधिका कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये सार रिश्तों के बाँधें हैं भगवान ने तार मन के बधे, बाँधें रखना प्रिये कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये मान सम्मान सारे किनारे रहे रखना कोने जरा सी जगह तु प्रिये कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये पहाडों कभी झील नदियों तलक मैं बहुँगा समन्दर की रेती प्रिये कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये मगहर रहूँ या कि मणिकर्णिका द्वारिका मेरी तुझमें समाहित प्रिये कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये

गुजर गये

गुजर गया ये  वक्त तेरे बिन कुछ कडवी सी यादों से पास बचा जो खट्टा मिठा साथ चला है सालों से दूरी कुछ लम्बी है हममें पास रहे कभी दूर हुऐ कुछ तो मेरे भाग मिले हैं कुछ औरों के  साथ मिले कुछ समेट पाया मनसे कुछ मनरे मनसे बिछड गये

यज्ञ का जौ

कुछ निशां होंगे  अपनेपन के जिन्हें छुपाना भी होगा मुझसे वरना अनायास मुलाकात ठुकराता कौन है हजार लाँक्षनों में भी  यज्ञ की अग्नि में चढा हुआ बीज हूँ या तो भष्म होना  या उगना सीखा सीखा है मैनें 

गढकरी जी

माननीय श्री नितिन गडकरी जी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, भारत सरकार विषय: केदारनाथ धाम को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-107 (NH-107) की अत्यंत जर्जर स्थिति के संबंध में। माननीय गडकरी जी, सादर प्रणाम। मैं उत्तराखंड का एक सामान्य नागरिक एवं इस क्षेत्र का मूल निवासी हूँ। बड़े विश्वास और आशा के साथ आपको यह पत्र लिख रहा हूँ, क्योंकि मुझे विश्वास है कि यदि यह विषय आपके संज्ञान में आएगा तो निश्चित रूप से इस पर गंभीरता से विचार होगा। केदारनाथ धाम देश के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु तथा हजारों स्थानीय लोग राष्ट्रीय राजमार्ग-107 (NH-107) से होकर यात्रा करते हैं। किंतु विशेष रूप से कुंड से गुप्तकाशी तक सड़क की स्थिति अत्यंत दयनीय, जर्जर एवं दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण देने वाली है।कई स्थानों पर सड़क टूटी हुई है, गड्ढों से भरी है तथा संकरी और असुरक्षित हो चुकी है। आश्चर्य की बात यह है कि अब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह केवल बाबा केदारनाथ जी की कृपा है कि यात्रियों की रक्षा हो रही है। अन्यथा इस सड़क की वर्तमान स्थिति किसी...

विकल्प

विकल्प था अनुकल्प हूँ सम्बन्धों का नाजायज हूँ भावनाओं का उद्दीप्त ज्वार सूखता सा वृक्ष हूँ नास्तिक था निर्मोही हूँ अंहकार से विरक्त हूँ तोल मोल का भाव नही नहीं कभी तथस्ट हूँ राहें तय हैं मंजिल तय है निराकार तुझमें शामिल हूँ

देवरा जाली राजराजेश्वरी माई

फिर देवरा जालु बाणासुर महाराज, राजमई सानिध्य बाणासुर महाराज। शिव शक्ति प्रतीक राजमई अभिलाष, कुल देवी, ग्राम देवी, दिशा भैंटिक आयी॥ सब देवियों थाती राजराजेश्वरी माई, दुष्टूं की विनाशिनी राजराजेश्वरी माई। फिर देवरा जाली आदि शक्ति राजमई॥ कठ्यूड़ बगवाड़ी और चंद्रू सुनार, ज्ञानदास कु ढोल और पोस्ती कु रुगर्यात। सब्यू दगड़ी जाली राजराजेश्वरी माई, फिर देवरा जाली ग्राम देवी राजमई॥ अवस्थी जुगराण और लालम्योरियूं की सारी, ड्वमड़ा बणुल्या और वरखोली-परखोली। फिर आशीष देली राजराजेश्वरी मई, फिर देवरा जाली आदि शक्ति राजमई॥ फिर देवरा जालु बाणासुर महाराज, राजमई सानिध्य बाणासुर महाराज। हजार हाथों कु बलशाली बाणासुर महाराज, शिव श्रद्धा कु भुखु बाणासुर महाराज। राजा बलि कु जायु बाणासुर महाराज॥ फिर देवरा जालु बाणासुर महाराज, राजमई सानिध्य बाणासुर महाराज॥ चित्रलेखा, अनिरुद्ध, ऊषा शौणितपुर, कृष्ण, बलराम और भुवंली लड़ाई। विजयी आदि शक्ति और अहंकार कु नाश॥ फिर देवरा जालु बाणासुर महाराज, राजमई सानिध्य बाणासुर महाराज॥ म्येरा स्कूल को देवता बाणासुर महाराज, म्येरा मैत्यूं की मैत्यांण, भक्तों की रखवाली। फिर देवरा जालु बा...

सांसे थमती नही

गाँव छोडा जिद छोडी सपने बिखरे उम्मीद टूटी भीड में अकेला सा जगा हुआ पर सोया सा साथ कहां साहस टूटा सब कुछ है पर खाली सा उम्मीदो की सडक है खाली सांसे अब क्यूँ रूक नही जाती दूर कहीं नैपथ्य बसा एक धुधलती आशा है मनरे मनसे कहता है बस साथ समर्पित  रहना है

भूत पिशाच

ना ऐडी रैन न आछरी रैन ना भूत न पिशाच रैंन मनख्यूं की मार यन च भुला कि बस जख द्योखा  तख प्लास्टिक का थैला रैन बजरी तुमन गाढी डाल्या तुमुन कटैन पाणी की योजना भी  बल तुम ही ल्येन पर भुला सारा गाढ गदरा  कैन सुखेन वौणु सारी  पित्र कुडू हरची गौ कु दवता  अर वौड हरची  किदार बल पर्यटन ह्वेगी अर भुला नरसिहं बल अब घात रेगी न डौंर च न भै च न बडूँ कू मान  न सम्मान च दवे कखी नी बस भुला दारू मासूं की  दुकान खुली च नाला नारायण कोटी गोबी नी सल्या तुनगा अल्लू नी गौरीकुण्ड घौडा पडाव ह्वेगी तिर्जुगी बल 'डेस्टिनेशन' ह्वेगी नारायण कू छज्जू नी रयूँ अर भुला गुप्तकाशी बल बजार ह्वेगी....

बेटी

कभी माँ मेरी कभी खुद की माँ कभी दीदी सी लगती है बेटी मेरी साथ है संजोग है कर्म मेरा वो भाग्य है संघर्ष में हर जीत सी लगती है बेटी मेरी ताकत मेरी  हिम्मत मेरी उन्नति के द्वार सी लगती है बेटी मेरी प्रीत की हर रीत की भक्ति में शक्ति मेरी सुन्दरी देवी की सी  लगती है बेटी मेरी आशिष है अभिलाष है मिन्नतों की पोटली लगती है बेटी मेरी कभी माँ मेरी कभी दादी मेरी कभी दीदी सी लगती है बेटी मेरी