लौटना पडेगा
दौड आया मैं मीलों सफर साथिया जो मिली ना मिली तो ना मिली राधिका कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये सार रिश्तों के बाँधें हैं भगवान ने तार मन के बधे, बाँधें रखना प्रिये कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये मान सम्मान सारे किनारे रहे रखना कोने जरा सी जगह तु प्रिये कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये पहाडों कभी झील नदियों तलक मैं बहुँगा समन्दर की रेती प्रिये कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये मगहर रहूँ या कि मणिकर्णिका द्वारिका मेरी तुझमें समाहित प्रिये कृष्ण कब कह गये थे मैं लौटूँगा अब फिर भी मैं लौट आवूँगा सुन तु प्रिये