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यज्ञ का जौ

कुछ निशां होंगे  अपनेपन के जिन्हें छुपाना भी होगा मुझसे वरना अनायास मुलाकात ठुकराता कौन है हजार लाँक्षनों में भी  यज्ञ की अग्नि में चढा हुआ बीज हूँ या तो भष्म होना  या उगना सीखा सीखा है मैनें 

गढकरी जी

माननीय श्री नितिन गडकरी जी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, भारत सरकार विषय: केदारनाथ धाम को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-107 (NH-107) की अत्यंत जर्जर स्थिति के संबंध में। माननीय गडकरी जी, सादर प्रणाम। मैं उत्तराखंड का एक सामान्य नागरिक एवं इस क्षेत्र का मूल निवासी हूँ। बड़े विश्वास और आशा के साथ आपको यह पत्र लिख रहा हूँ, क्योंकि मुझे विश्वास है कि यदि यह विषय आपके संज्ञान में आएगा तो निश्चित रूप से इस पर गंभीरता से विचार होगा। केदारनाथ धाम देश के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु तथा हजारों स्थानीय लोग राष्ट्रीय राजमार्ग-107 (NH-107) से होकर यात्रा करते हैं। किंतु विशेष रूप से कुंड से गुप्तकाशी तक सड़क की स्थिति अत्यंत दयनीय, जर्जर एवं दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण देने वाली है।कई स्थानों पर सड़क टूटी हुई है, गड्ढों से भरी है तथा संकरी और असुरक्षित हो चुकी है। आश्चर्य की बात यह है कि अब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि यह केवल बाबा केदारनाथ जी की कृपा है कि यात्रियों की रक्षा हो रही है। अन्यथा इस सड़क की वर्तमान स्थिति किसी...

विकल्प

विकल्प था अनुकल्प हूँ सम्बन्धों का नाजायज हूँ भावनाओं का उद्दीप्त ज्वार सूखता सा वृक्ष हूँ नास्तिक था निर्मोही हूँ अंहकार से विरक्त हूँ तोल मोल का भाव नही नहीं कभी तथस्ट हूँ राहें तय हैं मंजिल तय है निराकार तुझमें शामिल हूँ

देवरा जाली राजराजेश्वरी माई

फिर देवरा जालु बाणासुर महाराज, राजमई सानिध्य बाणासुर महाराज। शिव शक्ति प्रतीक राजमई अभिलाष, कुल देवी, ग्राम देवी, दिशा भैंटिक आयी॥ सब देवियों थाती राजराजेश्वरी माई, दुष्टूं की विनाशिनी राजराजेश्वरी माई। फिर देवरा जाली आदि शक्ति राजमई॥ कठ्यूड़ बगवाड़ी और चंद्रू सुनार, ज्ञानदास कु ढोल और पोस्ती कु रुगर्यात। सब्यू दगड़ी जाली राजराजेश्वरी माई, फिर देवरा जाली ग्राम देवी राजमई॥ अवस्थी जुगराण और लालम्योरियूं की सारी, ड्वमड़ा बणुल्या और वरखोली-परखोली। फिर आशीष देली राजराजेश्वरी मई, फिर देवरा जाली आदि शक्ति राजमई॥ फिर देवरा जालु बाणासुर महाराज, राजमई सानिध्य बाणासुर महाराज। हजार हाथों कु बलशाली बाणासुर महाराज, शिव श्रद्धा कु भुखु बाणासुर महाराज। राजा बलि कु जायु बाणासुर महाराज॥ फिर देवरा जालु बाणासुर महाराज, राजमई सानिध्य बाणासुर महाराज॥ चित्रलेखा, अनिरुद्ध, ऊषा शौणितपुर, कृष्ण, बलराम और भुवंली लड़ाई। विजयी आदि शक्ति और अहंकार कु नाश॥ फिर देवरा जालु बाणासुर महाराज, राजमई सानिध्य बाणासुर महाराज॥ म्येरा स्कूल को देवता बाणासुर महाराज, म्येरा मैत्यूं की मैत्यांण, भक्तों की रखवाली। फिर देवरा जालु बा...

सांसे थमती नही

गाँव छोडा जिद छोडी सपने बिखरे उम्मीद टूटी भीड में अकेला सा जगा हुआ पर सोया सा साथ कहां साहस टूटा सब कुछ है पर खाली सा उम्मीदो की सडक है खाली सांसे अब क्यूँ रूक नही जाती दूर कहीं नैपथ्य बसा एक धुधलती आशा है मनरे मनसे कहता है बस साथ समर्पित  रहना है

भूत पिशाच

ना ऐडी रैन न आछरी रैन ना भूत न पिशाच रैंन मनख्यूं की मार यन च भुला कि बस जख द्योखा  तख प्लास्टिक का थैला रैन बजरी तुमन गाढी डाल्या तुमुन कटैन पाणी की योजना भी  बल तुम ही ल्येन पर भुला सारा गाढ गदरा  कैन सुखेन वौणु सारी  पित्र कुडू हरची गौ कु दवता  अर वौड हरची  किदार बल पर्यटन ह्वेगी अर भुला नरसिहं बल अब घात रेगी न डौंर च न भै च न बडूँ कू मान  न सम्मान च दवे कखी नी बस भुला दारू मासूं की  दुकान खुली च नाला नारायण कोटी गोबी नी सल्या तुनगा अल्लू नी गौरीकुण्ड घौडा पडाव ह्वेगी तिर्जुगी बल 'डेस्टिनेशन' ह्वेगी नारायण कू छज्जू नी रयूँ अर भुला गुप्तकाशी बल बजार ह्वेगी....

बेटी

कभी माँ मेरी कभी खुद की माँ कभी दीदी सी लगती है बेटी मेरी साथ है संजोग है कर्म मेरा वो भाग्य है संघर्ष में हर जीत सी लगती है बेटी मेरी ताकत मेरी  हिम्मत मेरी उन्नति के द्वार सी लगती है बेटी मेरी प्रीत की हर रीत की भक्ति में शक्ति मेरी सुन्दरी देवी की सी  लगती है बेटी मेरी आशिष है अभिलाष है मिन्नतों की पोटली लगती है बेटी मेरी कभी माँ मेरी कभी दादी मेरी कभी दीदी सी लगती है बेटी मेरी

ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली : प्रशिक्षण, गुणवत्ता और जवाबदेही की चुनौती ; On-Screen Assessment Systems: The Challenge of Training, Quality, and Accountability

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर IB तथा IGCSE जैसी परीक्षाओं में प्रयुक्त RM Assessor प्रणाली और भारत में लागू की जा रही On-Screen Marking (OSM) प्रणाली के मूल उद्देश्य में कोई विशेष अंतर नहीं है। दोनों का लक्ष्य उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को अधिक पारदर्शी, त्वरित और विश्वसनीय बनाना है। वास्तविक अंतर प्रशिक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण तथा मूल्यांकन प्रक्रिया की निगरानी में दिखाई देता है। वर्ष 2009 से RM Assessor पर कार्य करने के अनुभव के आधार पर कहा जा सकता है कि इस प्रणाली में वर्षों के दौरान कोई क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं हुआ है। समय के साथ कुछ तकनीकी सुधार, नए प्रतीकों (symbols) तथा डिजिटल एनोटेशन के विकल्प अवश्य जोड़े गए हैं, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक मानवीय और व्यवस्थित प्रतीत होती है। किंतु इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी संपूर्ण संरचना परीक्षक प्रशिक्षण, मानकीकरण और गुणवत्ता आश्वासन पर आधारित है। RM Assessor में किसी भी परीक्षक को वास्तविक उत्तर-पुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रारम्भ करने से पूर्व निर्धारित प्रशिक्षण मॉड्यूल और प्रशिक्षण कैप्सूल स्वयं पूर्ण करने होते हैं। इसके अतिरिक्त उसे...

AI in education: We are prepared or simply worried

 Artificial Intelligence has become one of the most discussed topics in education today. Most academic conversations revolve around writing, research, plagiarism, lesson planning, content design, and the use of AI-powered applications. Yet an important question remains in my mind are we truly prepared for this transformation, or are we simply worried about it? Historically, every major technological advancement in education has first been met with concern rather than preparation. When calculators entered learning support, there was fear that students would stop thinking mathematically now they use GDC better in learning. When the internet became widely accessible, we the educators worried about misinformation and dependency. Today, we are spending more time discussing the risks and challenges of AI than building readiness and understanding. I believe that artificial intelligence is not merely about using applications for writing essays or conducting research. AI represents a broade...

इतिहास

संग्रहालय में कैद किये बस इतिहास कहां लिख पाये हम छूपे रहे जो तथ्य अनेकों सच कहाँ लिख पाये हम दर्ज हुई जो हार जीत में संग्राम कहां लिख पाये हम किसने कितने घोंडें पाले कब मर्यादा लिख पाये हैं अधजली हुई चिताओं पर जौहर गिन ना पाये हम बिछी रही रणभूमी लाशें रणबांकुरें कब गिन पाये हम