रचूँगा
मन में कुछ उत्ताप भरा लगा कभी सब हार गया हो कठिन रास्ते जीवन के फिर भी गीत रचूँगा मैं रचना का अपना सागर है अवसर सब विधानों के विपरीत बहें हर धार समय की फिर भी गीत रचूँगा मैं हार जीत की उलझन कब है कब पाना और खोना है साथ रहेंगी मधुर स्मृतियां और हरदम गीत रचूँगा मैं।