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Showing posts from April 5, 2026

चाहो तो

मुक्त करता हूँ मैं हर शपथ से तुझे कृष्ण कह जो गये थे सखा से कभी सारी बन्दिश मुझ ही तक रहेंगी सदा मुक्त करता हूँ हर बन्धन से तुझे  मैं निभाता रहूँ तुम भुलाते रहो साथ चलना जो चाहो अगर चल सकों  मैं रूका ही मिलूँगा उसी मोड पर उसी गाँव की तलहटी में प्रिये