चाहो तो

मुक्त करता हूँ मैं हर शपथ से तुझे
कृष्ण कह जो गये थे सखा से कभी
सारी बन्दिश मुझ ही तक रहेंगी सदा
मुक्त करता हूँ हर बन्धन से तुझे 
मैं निभाता रहूँ तुम भुलाते रहो
साथ चलना जो चाहो अगर चल सकों 
मैं रूका ही मिलूँगा उसी मोड पर
उसी गाँव की तलहटी में प्रिये

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