सांसे थमती नही

गाँव छोडा
जिद छोडी
सपने बिखरे
उम्मीद टूटी
भीड में
अकेला सा
जगा हुआ
पर सोया सा
साथ कहां
साहस टूटा
सब कुछ है
पर खाली सा
उम्मीदो की
सडक है खाली
सांसे अब क्यूँ
रूक नही जाती
दूर कहीं
नैपथ्य बसा
एक धुधलती
आशा है
मनरे मनसे
कहता है
बस साथ
समर्पित 
रहना है

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