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यज्ञ का जौ

कुछ निशां होंगे  अपनेपन के जिन्हें छुपाना भी होगा मुझसे वरना अनायास मुलाकात ठुकराता कौन है हजार लाँक्षनों में भी  यज्ञ की अग्नि में चढा हुआ बीज हूँ या तो भष्म होना  या उगना सीखा सीखा है मैनें