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Showing posts from June 28, 2026

गुजर गये

गुजर गया ये  वक्त तेरे बिन कुछ कडवी सी यादों से पास बचा जो खट्टा मिठा साथ चला है सालों से दूरी कुछ लम्बी है हममें पास रहे कभी दूर हुऐ कुछ तो मेरे भाग मिले हैं कुछ औरों के  साथ मिले कुछ समेट पाया मनसे कुछ मनरे मनसे बिछड गये

यज्ञ का जौ

कुछ निशां होंगे  अपनेपन के जिन्हें छुपाना भी होगा मुझसे वरना अनायास मुलाकात ठुकराता कौन है हजार लाँक्षनों में भी  यज्ञ की अग्नि में चढा हुआ बीज हूँ या तो भष्म होना  या उगना सीखा सीखा है मैनें