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Showing posts from August 9, 2026

वो नही

हर जहर पी लूँ शिव तो नही हूँ मैं आकार है अस्तित्व है निराकार नही हूँ मैं हर रस्सी चढ लूँ कलिदास नही हूँ मै शब्द हैं कलम है पर चैतन्य नही हूँ मैं और हाँ हर युद्ध जीत लूँ अर्जुन नही हूँ मैं पर अभिमन्यु हूँ वो नही कि हार मान जाऊँ मैं

सबकी वजहें

कहीं उम्मीदें कहीं इन्तजार  कोई ढलती शाम कोई सड़क वीरान बेरूखी की अपनी वजहें सबकी किसी के काम कोई परेशान कहीं वादें कहीं दास्तां कोई बढती बात कोई अधूरी पहचान बजहें सबकी किसी की कलम किसी के विचार 

आखिरी सांस

आखिरी जब सांस छूटे तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा जल गयी जब राख सब तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा कटते हजार पेडों टूटते जख्मी पहाडों सरहदें जब खत्म होंगी तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा जब प्रणय की वेदना में प्रलय का आभास होगा लाम पर जब रण रहेगा तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा समय के आखिरी छौर पर क्षितिज जब सिकुडा मिलेगा आस का हर बीज जब सडता मिलेगा तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा