वो नही
हर जहर पी लूँ शिव तो नही हूँ मैं आकार है अस्तित्व है निराकार नही हूँ मैं हर रस्सी चढ लूँ कलिदास नही हूँ मै शब्द हैं कलम है पर चैतन्य नही हूँ मैं और हाँ हर युद्ध जीत लूँ अर्जुन नही हूँ मैं पर अभिमन्यु हूँ वो नही कि हार मान जाऊँ मैं
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