आखिरी सांस

आखिरी जब सांस छूटे
तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा
जल गयी जब राख सब
तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा
कटते हजार पेडों
टूटते जख्मी पहाडों
सरहदें जब खत्म होंगी
तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा
जब प्रणय की वेदना में
प्रलय का आभास होगा
लाम पर जब रण रहेगा
तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा
समय के आखिरी छौर पर
क्षितिज जब सिकुडा मिलेगा
आस का हर बीज जब सडता मिलेगा
तब भी मैं जिन्दा मिलूँगा

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