बेटी
कभी माँ मेरी
कभी खुद की माँ
कभी दीदी सी
लगती है बेटी मेरी
साथ है संजोग है
कर्म मेरा वो भाग्य है
संघर्ष में हर जीत सी
लगती है बेटी मेरी
ताकत मेरी
हिम्मत मेरी
उन्नति के द्वार सी
लगती है बेटी मेरी
प्रीत की हर रीत की
भक्ति में शक्ति मेरी
सुन्दरी देवी की सी
लगती है बेटी मेरी
आशिष है
अभिलाष है
मिन्नतों की पोटली
लगती है बेटी मेरी
कभी माँ मेरी
कभी दादी मेरी
कभी दीदी सी
लगती है बेटी मेरी
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