दरवाज़े से

यूँ अहसास ख़ुशियों का मन रंग गया
कि रूठे से अपनो ने कुछ बात की हो 
वो दरवाज़े से लौट भी जाय तो क्या
ख़ाली होते शहर ने हँसने की कोशिश की है

जाले रिश्तों से हट जाये इस कोशिश मे
वो सुना गया है कुछ थोड़ी खरी खोटी
शहर जो बे-चिराग़ होने को है तो क्या
बर्क से ही सही पर चमकने की कोशिश मे है





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