उसे क्या दिखाना


गर्भ में पलता विश्वाश धीरे ही जन्म लेता है
अन्धविश्वाशो में ही पला हो जो
कब स्मृतियों की छाप छोड़ पाया

होती हैं लाखों साजिशें सत्य को मार देने की
जो झूठ की बुनियाद पर ही खड़े हों
वो खोखला रिश्ता कितनी दूर चल पाया

और जो मन में हो उसे क्या दिखाना
जो दिखाने में है वो भला
कब मन की गहराइयों को छू पाया 

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