कल की बात

संघर्ष था, मुराद थी और एक स्वप्न था
कुछ कोशिशें ब्यर्थ ही सही
सब कुछ तो अपना ही था
बात बस कल ही की तो थी !

लगन थी, कशिश थी और एक खिचाव था
वो सिखने की जिद, नाकाम ही सही
सब प्रस्थितियाँ अपनी ही थी
बात बस कल ही को तो थी !!

लोग थे, कुछ दोस्त थे और अपनापन था
वह हॅसने की कोशिशें, रुलाती हुई ही सही
सब अपने इर्द-गिर्द तो थी
बात बस कल ही की तो थी !!!

हर बात जो ये सोचकर कल पर छोड़ दी थी
कुछ ख़ाली कलों को जमा कर गयी
स्मृतियाँ सब जहां में घर कर गयी
बात बस कल ही की तो थी !!!!

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