तू कभी

तू कभी माँ के आँचल सी लगी
कभी बहन के श्रृंगार सी लगी
सोचा है तुझे प्रेयसी सा कभी
कभी बेटी की नटखटता सी लगी

तू ही था कभी पहाड़ सा लगा
साखों पर झूलता कोई बच्चा लगा
देखा है तुझे कोमल बछड़े सा कभी
कभी माँ का बोया वह जंगल सा लगा

तू कभी बचपन के दोस्त सा लगा
कभी घूरता हुआ कोई बुजुर्ग लगा
देखा है तुझे हर रूप में
हर बार तू मन के सबसे करीब लगा ..... 

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