तू भी मै भी

क्या सच था क्या झूट था
न तूने कभी समझाया
न मै शायद समझ पाया
तू भी खेलता रहा मै भी .....

वो रूककर चलना झूट था, बता जाना
वो कहकर मुकर जाना, बता जाना
स्नेह की नज़र के खोट
तू भी पहचानता होगा मै भी ...

वो लिख कर मिटा जाना, बता जाना
वो नज़र से गुस्सा होना, जाता जाना
दो चार बाते मन की जो सुनाई नहीं
तू भी सुना जाना मै भी ...

खुलकर जो कह नहीं पाया, कह जाना
रुशवा करना था दोस्तों मै, कर जाना
मन के दाग जो दिखे नहीं
तू भी लगा जाना, मै भी ......

जब जाना तो यूँ जाना कि सब कुछ कह जाना
हो गाली या अपनापन सब जाता जाना
जीवन की अनमिट अधूरी बातों मै
न तू जी पायेगा, न मै भी .....

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