खोया तो बड़ा होगा

बाहर ईद में दीवाली के पटाखें हैं
अंतर्मन के कुछ ख्वाब अधूरे हैं
ख़ामोशी जारी है नैपथ्य की
कुछ खोया तो बड़ा होगा

शहर की सुनसान सड़को पर घूमकर
अहसास हुआ कि थमा सा है
अकेलापन जारी है भीड़ का
कुछ खोया तो बड़ा होगा

अशांत मन से हालत पूछे हैं कई बार
पाया कि जबाब भी नदारत हैं
जारी हैं जीवन की कशमकश
कुछ खोया तो बड़ा होगा 

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