खोया

जीवन कब एक सा रहा 
जो पाया उसका गुमान नही
खोया, आज भी ‘मन’ ढूँढता है
हर कोशिश में वोही तो साथ रहा

हर मंज़िल कहाँ ठहराव होती है 
कुछपल रुककर फिर बढ़ जाना है
खोया, सब कुछ हारना नही होता
कुछ तो है जो शक्ति बन साथ रहा

रिश्ते भी सब कहाँ पास होते हैं
बस मन में होते हैं कहाँ साथ होते हैं
खोया, उन्हें यूँ तो कोई दर्द नही होता
वोही है स्मृतियों के साथ मन मे बसा रहा 


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