सच्चाई गुम है

घर के किसी कोने में 
सासों की कोई झडी है
पुराने सामान के ढेर में 
कुछ बहुत अनमोल है 
जाने कैसी होगी ‘सच्चाई’
जो नज़रों से दूर हैं 

‘मन’ के किसी कोने में
स्नेह की कोई बात है
रास्तों के बिखरे आसमान में
पेड़ों की कोई छांव है 
जाने कैसी होगी ‘सच्चाई’
जो एक तरह से अनमोल है

क्यारी की किसी पंगत पर
फूलों का कोई झुण्ड है 
मन के कोनों से वो नज़र ढूँढती रही
ठिठकते पैरों के थाप सूनी हैं 
जाने कैसी होंगी ‘सच्चाई’
जो जहां मे कहीं गुम है 




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