कचोटता लगें

खामोशियाँ जब गुमनाम होने लगीं
सिसकियाँ जब दम तोड़ने लगीं  
यकीं है तू फिर रुलाएगा
यादें जब धूमिल होती लगीं

हर कोशिश जब हारने लगीं
मंजिलें जब छुपने लगीं
यकीं है तू दौड़ा आएगा
हर कदम जब रुकने लगें

कौतूहल शहरों का शांत सा लगें
सन्नाटा जब बोलने लगें
यकीं है तू आवाज़ देगा
वीराना मन का कचोटता लगें 

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