गहराती छाँव

तु साथ लगा उन चेहरों मे
जिस भीड़ मे तु साथ नहीं
तु साथ लगा उन शामों में
जिन राहों में तु पास नहीं

तेरा नाम दिखा हर पन्ने पर
उस किताब में तेरा जिक्र नहीं
तु याद रहा उन बातों  में
जिनसे तेरा कोई सरोकार नहीं

तु पास रहा हर उत्सव-क्षण मे
सूने मन में गहराती छाँव रही
सबकुछ पाकर भी खोया जिसको
उस गुमनामी का खौफ नहीं 

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