बोलती शान्ति

अधधुले दाग हैं मन की गहराई में
जो मिटाते रहे पर मिटा ना सके
दूर तन्हाई ने जब भी आवाज दी 
वो सुनायी पडी बस तुम्हारे लिए। 

साथ चलता है साया परछाईं में
जो छूडाते गये पर छुड़ा ना सके
सुनी राहों ने जब भी आवाज दी 
पार दिल के गयी बस तुम्हारे लिए।

मौन में बोलती शान्ति उमडायी है
जो गुनगुनाते गये पर कही ना गयी
जो कहानी कभी भी लिखी ना गयी
मन में बसती रही बस तुम्हारे लिए ।

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