तु ही सदा

मन्नतों की घंण्टीयों में तु
आस के तालों में तु
चढाई हुई चुन्नी में तु
प्रसाद की हर थाली में तु
दुवावों में तु दवाओं में तु
चढती सीढियों में तु
लम्बी सी कतारों में तु
अभास में तु अहसास में तु
मिलने में तु खोने में तु
हंसने में तु रोने में तु
सोने में तु जगने में तु
हर पल हर घडी में तु
तु ही है तु ही सदा
तु भीड में तु मौन तु
तु शैव ही तु शिव मेरा
आदि से अब अन्त में तु

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