आयेगा तो सही

उम्मीदों का एक तारा दिखता तो है दूर कहीं 
वहीं आशंकाओं के बादल लुकाछिपी करते हैं कहीं
बूँदें गिरती तो हैं स्नेह की इस रेगिस्तां पर 
किकर ही सही आशाओं का बसन्त आयेगा तो सही

तस्वीर नही न वो बारिश है न हाथों में हाथ कहीं
न मंहन्दी का रंग है न गात पर छापों का निशां कोई
बातों का अपनापन और लबों की सूर्खिया नही
बरसों के बाद ही सही तु खेवनहार आयेगा तो सही

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