छोटी सी

यूँ छोटी ही सही,

पर खुशीयां क़रीब है।

बड़े बरगद की एक साख है,

छोटे ‘मन’ का प्यार है।

उसमें वजूद क्यों ढूँढे 

जो ख़ुद मे यूँ शामिल है ....

Comments

Popular posts from this blog

रिश्तों को अमरत्व

कहाँ अपना मेल प्रिये

द्यू धुपणू