दर्द का कोना

तुझ जैसा बरसों में एक 
चाँद ज़मीं पर उतरा था 
भीगीं पलकों को ज़ब देखा
सूखा दर्द का रोना था 

तुझ जैसा अपनों में एक 
गुमशुम खोया चेहरा था 
तेरे ज़वाबों को जब ढूढां 
खोया अर्ज़ का बाना था 

तुझ जैसा आईनों में एक 
धूमिल शक्स पुराना था 
खोला जब यादों का पिटारा
पाया दर्द का कोना था 


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