तु सब दे गया
तु भी चल दिया
कुछ अपनापन
कुछ यादें दे गया
विश्वास की सौग़ात
स्नेह की अनमिट
पावन कहानी दे गया
समृतियों मे पनपता
एक ख़्वाब दे गया
बुज़ुर्गों के आशीष का
स्नेहभरा हाथ दे गया
जीवन को अपनों सा
अहसास दे गया
अविश्वास के उलझे
सारे तार तोड़ के गया
सादगी के धवल पैग़ाम
सच्चाई के पल दे गया
जीवन की गहराइयों को
एक नया मतलब दे गया
Comments
Post a Comment