सांसो की खुशबू
मैं रखता हूँ समेटकर
तेरी ताजगी की टोकरी
सांसो की खुशबू लेकर
राह राह उड़ता रहा
थके परेशां लोगों को
उड़ती चलती धूलों को
खुशबू मेरे आँगन की
फूलो सी एक टोकरी
दुःख दर्दो के तानों को
खोये बिछड़े रिश्तो को
खुशबू फसल घंघरिया सी
सरसों की एक चौकरी
हंसी ख़ुशी के रंगो को
कोमल सकुचाई देहों को
खुशबू उस कस्तूरी सी
जंगल की एक बाबड़ी
गुमशुम सी आवाजों की
गहरी गहरी सांसो की
खुशबू तेरे तन मन की
सोंधी गीली मिटटी सी
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