चलिग्यें (गढ़वाली ग़ज़ल)

आँसू नी बगदा सदानीं 
आँसू सुख्येदा नी
मौल्यार ऐं भी जाँदी
ठंगरा हरैन्दां नीं 

बगणीं सी रैं सदानी
आस पछ्याणीं नी
उगदी त रै सदानीं
माटु ख्वजादीं नीं

लगुली सी रैं बढाणीं 
टूख पौछेन्दां नीं 
बगदी त रै सदानी 
दगडी  मिलदा नी

बणुल्यूं मा रै सदानी 
समणीं दिख्यैंदा नीं
चलिग्यैं परांण छोड़ी 
खुद मिट्यैंदी नीं

आँसू नी बगदा सदानीं 
आँसू सुख्येदा नी

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