पेड

तु पेड़ है, तेरी छांव है,

तेरी छांव है दरख्त भी

तेरा हक़ है कौन बैठें।

उगाये हैं हमने सम्मानों के जंगल,

इसीलिये गुमनाम होता हूँ ।। 


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