तु ही

यूँ बेरंग होकर भी,

हर जगह तेरा ही रंग है।

ख़ामोश जो दिखता है,

चारों तरफ़ उसका ही शोर है।

जिसके लिए हम नावजूं रहै,

अपने वजूद की जब तलाश की,

तो हर जगह वो शख़्स ही मिला ...

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