वो स्नेह

वो स्नेह कुछ यूँ रहा,

कि अब तेरे शब्द भी नहीं रहे।

ख़ामोश तु कब से था,

मौनमयी हुई है भाषा अब, 

तु ही बता!!

तेरे अनकहे शब्द कैसे पढ़ूँ ....

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