तेरा आधा क़दम

वो जो आधा क़दम 

ठिठक सा जाता है। 

भीड़ मे घिरा हो

पर सहम सा जाता है।

नज़र चुरा ले 

पर पलकें झुका लेता है।

वो जो अजनबी 

मन से उतारा नहीं जाता ....

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