अपनो के साथ

वो मन पर लकीर 
खींच कर चला गया
वो बीज गहरा 
डाल कर चला गया
अनमिट ही रही 
पत्थर की आशा
नीव गहरी थी कहीं 
कोई हिला न सका 
वो अपना सा अपनापन
देकर चला गया 

जीवन को अनमिट 
यादें देकर चला गया
वो मन को इन्द्रधनुषी 
रंग मे रंगा गया 
ये तमन्ना नही उसे 
जीत लूँ या हार जाऊ 
हर हार मेरी उससे 
जीत से कम न थी 
वो खुशी या ग़म बस 
अपनो के साथ सी मीली


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