सियार दोस्त

तुम चिठ्ठी लिखती बुद्धिजीवी मै क़लम चलाती कविता हूँ 
तुम NGO के पैसों मे मौज उड़ाती मैं महनतकस किसान हूँ 
तुम सियार दोस्तों का हो झुण्ड प्रिये मै अकेला लड़ता फ़ौजी हूँ 
#कहाँफिरअपनामेलप्रिये

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