तेरे मेरे
खाली रस्तों पर दौड़े हैं
तेरे मेरे बीच के नाते
कच्चे डोरों मे उलझें हैं
तेरे मेरे बीच के धागे
गहरे घाव बना बैठे हैं
तेरे मेरे भाव के चेहरे
रंगों में बेरंग रहे हैं
तेरे मेरे बीच के साये
दूर कहीं जाकर बस बैठे
तेरे मेरे बीच के रिश्ते
मन मन्दिर पर छाये रहे है
तेरे मेरे बीच के वादें
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