निशां

गहराती एक इबारत को
एक नया अंजाम दे आया
मैं मन को छोड़ आया हूँ
और खुशबू संग लाया हूँ

अधूरी सांस रख दी थी
उत्ताप धड़कते सीने पर
समेटी पखुड़ियां कोमल 
और निशान संग लाया हूँ

घरों को एक कर बैठै
कोने अहसास रख आया
लगाया है गले उसको
और यादें सग लाया हूँ

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