तु और मैं
काशी मैं केदार मैं जलता सा शमशान मैं बीज मैं विनाश मैं कुरूक्षेत्र सा धमासान मैं मुरली मैं कोदंड मैं मौन का तांडव भी मैं सूचक्र मैं गांडीव मैं रण का चक्रव्यूह भी मैं शेष मैं खत्म मैं सृष्टी का संजोग मैं हूँ आदि मैं हूँ अन्नत मैं शिव भी मैं सनातन भी मैं मैं जो मैं नही मैं तेरी परिछाई हूँ तु जो तु नही मैं तेरी पहचान हूँ...