तेरे शब्द

तेरे पास शब्द न बचे रहे,

ये अहसास था मुझको।

अब भावनायें मर सी गयी,

दुख इस बात का है ।।

फिर कौन है जो बिष वृक्ष बो रहा,

ये जो अजर अमर बचपना है!!

क्या अब इसे भी मार दूँ?

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