लाल बाग के राजा

वो लाल बाग़ के राजा वाला
मै अक्खण औगण बाबा का
वो  चौपाटी की फैली शाम
मै वृंदावन की कुंज गली 
वो सरल सरस गंगा जी है
मै तेज़ तर्राती ‘मन्दाकिनी’......


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