रंचना है
वो करीब है जो दूर है
स्मृतियों में रचा बसा
संसार है
आस की किरण है
संवेदनाओं का मज़बूत
सरोकार है
वो मौन है जो भीड़ मे है
अकेलेपन मे घुला मिला
सुस्वाद है
भावनाओं की ज्योत है
विश्वासों का मज़बूत
हिमालय है
वो चुप है जो सीमित है
ख़ामोशी मे आस पास की
रंचना है
विचारों की दृढ़ता है
गहरे इरादों के राह की
जड़ता हैं
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