क्यों चुप हो

क्यों चुप हो
वो गिने चुने शब्द नही हैं
या कि मौन हैं 

ये खामोश सोच
अक्सर तुझ तक ले जाती है
या कि वहम पाले हैं।

क्यों कमी में
अपना कोई सम्पूर्ण लगता है 
या कि कोई नही हैं।

ये खोया ‘मन’
किसी को सोचता सा लगता है 
या कि भटका कहीं है ।


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