हाथ

जो पकड़े छूऐ 

कभी नही 

जो मिले कभी

तो डरे लगे 

वो उन हाथों का 

जादू था

जो साँसों में ही 

बहा सदा 


जो उठे नही 

कभी हिले नही 

नही पास बुलाया 

दूर रहे 

वो उन हाथों 

का जादू था 

जो लकीरों में 

कभी था ही नही

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