संग जीवन

 वो कहता कम, 

जानता सब है 

मुझे उसकी जरूरत है 

वो ये मानता कब है 


मेरे हर अनुनय को 

मना कर मान जाता है 

मुझे उसकी कमी सी है 

वो ये जताता कब है 


वो हँसता है नादानी पर 

संकल्प पर रूठ जाता है 

मुझे संग जीवन जीना है 

वो ये जानता  कब है


वो सुनता है कहता है 

दिनों चुप बैठ जाता है 

मुझे हर पल जो कहना है 

वो ये सुनता कब है 

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