Posts

नाम तेरे जिंदगी

 हर कदम पर इन्तहां जो ले रही है जिंदगी  हूँ मैं जिद्द पर आजमाले नाम तेरे जिंदगी  हाथ हो महेंदी रची या मांग सिन्दूरी भरी  हर  समर्पण साथ मेरे नाम तेरे जिंदगी  तेरे शब्दों से  सदा घायल हुई है जिंदगी  मान अपनी अब चूका हूँ नाम तेरे जिंदगी  शब्द भेदी बाण हो या तू मुकर जाये कहीं  हर कसम में साथ मेरे नाम तेरे जिंदगी तेरे रुख का कुछ पता चलता नहीं है जिंदगी  हर दिशा ठहरा मिलूंगा नाम तेरे जिंदगी  हूँ मैं सम्मानों में या गिर नज़र जाऊँ कहीं  हर धड़कती साँस मेरी नाम तेरे जिंदगी  जानता जीवन सदा से खाली सी है जिंदगी  अब खड़ा या टूट जाऊँ नाम तेरे जिंदगी  जानता तु न डिगेगा कम नहीं होगा कहीं  प्रीत की सब रीत तुझसे नाम तेरे जिंदगी 

सुन ओ साथी

 सुन ओ साथी साथ तेरा  वक्त की हर मांग मेरी  हर ख़ुशी का साथ तेरा  हर रवानी आस  तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  साँस की हर मांग मेरी हर कदम पर साथ तेरा  हर जवानी प्यास तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  कोने घर के  मांग मेरी  हर समय पर साथ तेरा  हर अर्चना में ज्योत तेरी   सुन ओ साथी साथ तेरा  संघर्ष में है मांग मेरी  हर लक्ष्य माँगा साथ तेरा हर रीत में है प्रीत तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  बीच रखना मांग मेरी  हर प्राण माँगा साथ तेरा  हर दुआ में सोच तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  मेरे जीवन की कहानी  हर छन्द का आनंद तेरा  हर बांसुरी में गीत तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  मेरे जीवन की निशानी  हर कोशिशों में नाम तेरा हर स्वप्न में तस्वीर तेरी     सुन ओ साथी मर्म तेरा  मेरे जीवन की पहेली  हर सवालों नाम तेरा हर उदीची मान तेरी 

वही अहसास

 कहीं यादें जो ठहरी हैं  हजारों उम्मीद बाँधी हैं  बुलाता है सफर तुझको  की तु ही मेरी मंजिल है  कभी न दूर लगता है  न बोझिल सा लगा मुझको  जो राह तुझ तक जाती है  बड़ी ही पास लगती है  कहीं पर हो मिलन अपना  हजारों याद बनती हैं जो समय बीते तेरी बाँहों  वही अपना सा लगता है  कभी खुशबू तेरी बनकर  सांसो में समाती हैं लिपटकर एक हो जाना  वही अमरत्व लगता है  कभी उस देह पर कोई  असर सा छोड़ जाती हैं कोमलता जो तन मन की  वही अहसास बचता है  कभी हाथों की रेखाएं  हथेली में समाती हैं  मादकता लबों की जो  वहीं मदहोश करती हैं आ लग जा गले भर फिर न छूटें हाथ हाथों से  जब आत्मसात हो हम दोनों  वही जीवन सा लगता है 

मेरी गंगा

 मेरी भी एक गंगा है  जो मुझमे बहती रहती है  सम्मानों के पार शिखर से  मुझसे कहती रहती है  हर धारा स्नेह भरी है  ओत प्रोत सी  रहती है  मुझको अपने संग बहाकर  मुझमें मिलती रहती है  मेरी भी एक गंगा है  जो स्वच्छ सावली दिखती है  पतित पावनी मन मंदिर से   मुझमें रमति रहती है  हर स्पर्श अनोखा है और रोम रोम में बसती है  मुझको अपने रंग ऱगाकर  मेरे रंग में रंगती है  मेरी भी एक गंगा है  जो मंद मंद सी बहती है  हर खुशबू का झोंका ओढें मुझे ढाँकती रहती है  हर समय की बाँध वो सीमा  संग संग में चलती है  मुझको अपने साथ मिलाकर  मुझमें घुल ही जाती है 

सो नहीं पाया

 जीवन चलता तो रहा  पर ढल नहीं पाया मंजिल पास थी मगर  पर चल नहीं पाया  हर और रही ख़ामोशी जब  कलम उठाकर लिख डाला  जब कहना था कुछ तो  मनन तुम्हारा कर डाला  हर ओर रहे कुछ चेहरे  अपनों को पास नहीं पाया  हँसता तो दिखा हरपल मगर मैं  रो नहीं पाया  जिरह करना सीखा था    पर जबाब दे नहीं पाया  उन नादानी के प्रश्नों पर  माफी मांग नहीं पाया  यूँ चलता ही रहा है जीवन  पर थम नहीं पाया  रात अँधेरी लाखों हैं पर सो नहीं पाया 

गोदी सुला ले

 आज कुछ चिंता सी कुछ मन उदास है  आ गले लगा ले कुछ देर थाम लूँ सांसे   हारा नहीं थका नहीं बस चलता ही जाता हूँ  भर आगोश जरा सा आ पसार ले बाहें  निश्चय नहीं होता कुछ समय मांग बैठा है  बह जाएँ कुछ आंसू आ गोदी सुला ले  मन जाता है तुझ तक कह न पाए कुछ भी  आ कह दें सब कुछ मन की बस मौन रहे सब बातें 

बिन अहसास

 शायद वो अधूरा मेरे बिना उसके बिना मैं अधूरा हूँ  बिन दीपक जो जले है बाती बिन खुशबू का झोंका  हूँ  कोरे कागज़ खाली कलमें  लिखता कभी मिटाता हूँ  बिन प्रेषक के लिखी है पाती बिन पत्राचार का साथी हूँ  डोर कहीं एक छोर बंधी है  चलता  थमता रुकता हूँ  बिन पिपासा बढ़ता जाता  बिन मंजिल का राही हूँ संग संग कुछ दूर चले हैं  सपने अनगिनत सजता हूँ  बिन संगम के बही है नदिया  बिन छोर का सागर हूँ  कब रचता हूँ प्रेम तृषणगी कब गीत मिलन को गाता हूँ  बिना नाम कुछ रिश्ते होते  बिन अहसास का पत्थर हूँ 

असर

 जिस मोड़ पर खड़ा हूँ मैं  बेरुख हवाएं प्रीत की  तु जो होता नाराज़ तो  बात असर की कम ही थी  बातों का सूखा रूखापन  बेदर्द सदायें प्रीत की  तु जो होता बेतरतीब तो  बात असर की कम ही थी सबका गुस्सा मुझ पर जो   बेमन अदाएं प्रीत की  तु जो होता अजनबी तो  बात असर की कम ही थी स्नेह आंकलन कब है ये  कब  ये परीक्षा प्रीत की  तु न होता प्रेम पथिक तो  बात असर की कम ही थी पल पल कमता जायेगा जो जीत न होगी प्रीत की  तु मन के सबसे पास न होता तो  बात असर की कम ही थी

साथ

 तु जो साथ देता हर मोड़ पर  क्या था मुझमें पता नहीं  तूने दाम मेरा बढ़ा दिया  मैं सिफर ही था सदा यही   जो तूने जोड़ा है अपनों में  क्या मेरा बजूद पता नहीं  तूने हक़ मेरा दिला दिया  मैं खो गया था सदा यही   जो लिखी हैं तुमने ये इबारतें क्या मेरा नसीब पता नहीं  तेरे पास थे मेरे लाख से  मुझे तुझसा कोई मिला नहीं जो तुमने सजा दी है मांग में  क्या मेरा ये रंग पता नहीं  तूने सांसों को बढ़ा दिया  मैं छोड़ चूका था देह पहले कहीं  

मंजिल मिल जाती है

 जो राहें सुकूं तक जाएं अक्सर लम्बी होती हैं  इंतजार जब लम्बा हो  मंजिल मिल ही जाती है  अन्वेषण अनुसंधानों की  समय सारिणी लम्बी है  हों निरंतरता विश्वासों की  मंजिल मिल ही जाती है बट बृक्षों की ठंडी छाँव बरसों का प्रयास है  हो समर्पण रिश्तों में  मंजिल मिल ही जाती है कटते जलते जंगल की  परिस्थितिकी बनती है  समय मिले एक सोच को तो  मंजिल मिल ही जाती है