राह तकूँगा
आयें ना आयें राधव तेरे
मैं केवट सा खडा मिलूँगा
राह तकुँगा सदियों सदियों
मैं बीज सा दबा मिलूँगा
होती अविरित गंगा बार एक
मैं बरखा की आस तकूँगा
जायें ना जाये काल अमावस
मैं पौछा पानी लिए मिलूँगा
पतझड पतझड सर्द हो मौसम
मैं बसंन्त की आस तकूँगा
होते कब दिन एक समाना
मैं दिन उसकी आस तकूँगा
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