आस हो तुम
देह से देह मिली न मिली
पर प्राण सदा तुममें ही बसे
प्यास पपीहा बुझे न बुझे
पर आस धरा तुमसे ही रही
धारा कभी नदिया में मिले
नदिया जाय सागर खोई गयी
सांस से सांस मिले न मिले
मन खुशबू सदा तुमसे ही रही
राह कोई भी मिले ना मिले
पर मंजिल साथ तुमसे ही रही
पत्थर पूजे जो पूजे कई
मर मूरत बास बसी है तेरी
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