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अनायास

एक गीतों की बानगी सांसो ने लिखी कहीं  हाथों हाथ मिले मगर अहसासों की बन्दगी  शामों की फिजाओं में मनों की खामोश स्वीकृति तन मन दोनो एक हुए दुनियां की परवाह नही लबो के रंग मिल गये हमजोली परिधानों की छुकर बार बार गये वो कोमल स्पर्श पंखुडी उत्तापों के तापों पे हिलोर लगायी बानगी झूले पर्वत साथ समुन्दर समा गयी सब धारनी  सीमित समयों ने छेडी है सीमित तान मल्हार सी बाहों संग समा बैठी है कोमल तन की अगडायी दो से एक हुए मन तर्पण संग बडी अतुरायी भी खुद को खुद के साथ समाकर खुद से मिली दिवानगी

मेरी गंगा मुझ में बहकर

मिलने की दुश्वारी होती  म्यानें ही खुल जाती हैं  भाव बढ़ा त्योरी चढ़ जाती  बात बात अड़  जाती है  स्नेह समर्पण साथ रखे  हम बात बात लड़ जाते हैं  तय किये हुई कुछ बातें होती  मिलने पर आ जाती हैं  देर हो गयी झट से आओ  गुस्से से कह जाती है  रोष जोश भावों में दिखता मन में पिघल ही जाती है  एक नज़र नजरों से मिलती  कथा पलट सी जाती है वो मुझमें खो जाती है  और साँसें थम जाती हैं  कहती है सब करो जो ठाना गीत मिलन के गाती है  साँसें देकर जीवन देती  मुझमें घुल सी जाती है  हो समर्पित मुझमें बहती  मेरी गंगा  बन जाती है  कर पवित्र एक धाम रचाती बंधन जोड़ सी जाती है  पल से दिन और दिन से हफ़्ते  सालों की कशिश मिटाती है   मेरी गंगा मुझ में बहकर  प्राण वायु दे जाती है  जन्मो का एक बंधन जोड़ती  जीवन दर्शन देती है  मेरी गंगा मुझ में बहकर  प्राण वायु दे जाती है 

तुने संग आकर

बुझती हुई चिता सा राख भर था जीवन एक तुने साथ आकर जीना सीखा दिया है खाली पडा मकां सा विरान था ये संकल्प एक तुने साथ आकर सांसों हवाऐं दी हैं बँधता हुआ है पुल जो आशाऐं बँध रही ही एक जीतती सी कोपल अब साथ बढ रही है है ये सफर कठिन सा पर राह दिख रही है मंजिल की आस किसको एक साथ ढूँढती है उलझी हुई सी तान सा वे-ताल था ये जीवन एक तुने संग आकर सुरताल भर दिये हैं बेशब्द बे-मुर्रबत बे-आस था ये जीवन एक तुने संग आकर अमरत्व भर दिया है जीने की वजह तुम हो मरने का ढोंग तुम पर इस शाम की निशा का ढलती सी रात तुम हो

अहसासों की रात

अहसासों की रात  जिन्दा है मन में खुद से खुद की मुलाकात  घर कर गयी है मन में समर्पण की सादगी बात कह गयी मन में तुम से हम की पहचान एक कर गयी मन में अधजगी सी अपनी रात सूत्र एक पिरो गयी मन में कहनी थी हर जो बात वो कह कर गयी मन में  रंगों से सजी धजी रात  आत्मसात करा गयी मन में रचनी थी जो हर एक बात वो शब्दों को बाँध गयी मन में कविता रची कहानी बन गयी क्यारी सी खिला गयी मन में अपना सब कुछ मुझे देकर  वो खुद भी समा गयी मुझमें 

फिर समर्पण

 होंठ चुप थे आखें बंद थी  वो चेहरा कहानी कह रहा था  बाजुओं में बेसुध बिखरे थे बाल  समर्पण एक बानगी फैला रहा था  बेसुध था उत्ताप तनो का  मन में कुछ रच बस गया था  मद्धम सांसें कुछ कह रही थी  समर्पण एक कहानी लिख रहा था  स्पर्श हर ओर था शान्ति को समेटे  अहसास मन रंग भर रहा था  पास बुला रही थी सादगी चेहरे की  समर्पण स्नेह की फुलवारी सजा रहा था 

किरण

 चमकता है तू जग रौशन  किरण है तु उम्मीदों की  नया सा एक जहां अपना  बसा ले एक जमीं अपनी  आ मिल जाय एक हो जा  संगम एक नदिया सी  बहेंगे संग मीलों तक  समुंदर राह जीवन की  वो जो पदचाप छोड़े हैं  छोरों पर समुन्दर के  किसी एक शाम लौटेगा  वो सपनो का शहर बनकर  हकों के रास्ते तय कर  चले हैं जिस डगर पर हम  कोई सुबह तो आएगी  आशाओं की किरण बनकर 

संग मिलाना है

 कोशिशें हार भी जाय  तब भी मैं कोशिश करूंगा  या तुझमे खो जाऊँगा  या तुझसे लिपट जाऊँगा  फिर रहा था अपनी तलाश में  मुझसे मेरा मिजाज अब मिला  या पाना है बस  तुझको  या तुझसे लिपट जाना है  वो जो सांसों में रहता है  मन का एक शिवाला है  या तो पाना है उसे  या पूज लेना है  ढूंढा है जिसे सदियों  वो मन के अंदर ही मिला  या तो संग मिलाना है उसे या उसमे खो जाना है 

अब भी स्नेह है

 दो पहलू हैं दो छोर हैं  विकल्प हैं या जरूरी नहीं हैं  असमंजस की खींचा तानी  परवाह नहीं है या विश्वास है  शुरुआत तुझसे हो कि मुझसे हो  भावनाओं के लिए ये जरूरी नहीं है  चुप था कि तब भी स्नेह था  कहना है सब कुछ कि अब भी स्नेह है  अभिमान नहीं खुद का भरोसा है तुझपर  व्यस्तता तुझतक है मुझसे नहीं  खुली किताब हैं राज मन में नहीं  जताया तो स्नेह है गुस्सा हैं वो भी स्नेह है 

संवाद

 तेरे और मेरे बीच में  शब्दों का संवाद है  मैं लिख हूँ तु पढ़ लेता है  अहसासों का एक संवाद है  भावों में बसता है जीवन  आखर कहते रहते है  मैं जता लेता हूँ तु सुन लेता है  अपनेपन का एक संवाद है  मनों में विश्वास पलता यादों में हरपल रहता है  मैं मना लेता हूँ तु मान जाता है  रिश्तों का एक संवाद है  तेरे मेरे बीच में  अनोखा सा संवाद है  चुप मैं रहता हूँ चुप तु रहता है  मौन का मौन से संवाद है 

छाँव का विस्तार

 यूँ तो हो तुम साथ में  आवाज़ में अहसास में  हर वक़्त है कब हाथ थामे  यूँ सदा हैं आस में  हम सदा संगम पे मिलती  एक कोई नदिया रहें  मैं नाव सा ठहरा मिलूंगा  जीवन नदी संग बह चला  यूँ तो तुम हो पास में  हर साँस में अंदाज में  मैं खेत की एक मेढ़ पर  एकटक बिजूका रह गया  हम पथिक हैं साथ में  कुछ शाम यूँ चलते रहें  मैं छाँव का विस्तार फैलूँ  तू मेरा सूरज रहा