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लब

 वो लब जो खुले नहीं  हिले नहीं बोले नहीं  छुवन का अहसास ही  मोक्ष की सी तृप्ति है  देखा नहीं सोचा नहीं  चाहा सदा माँगा नहीं  जो खुल गए मेरे लिए  एक समाहित तृप्ति है  फर्ज अब जो कर्ज है  समर्पण की बानगी  तोड़ रिश्तों की दीवारें  इस जीवन की तृप्ति है  इस पत्थर पर घिस गयी   नायब खुशबू कस्तूरी  अमरबेल सी लिपट गयी  हर रिश्ते की तृप्ति है  बँध चुका बिश्वास हूँ  बच गयी पहचान हूँ  थम गए इस सफर पर  मंजिल की सी तृप्ति हूँ 

आँखे

 कभी एक झलक भर जो  उठकर कहती थी आँखे  झुककर भी असर उनका  सदा मन जोड़ देता था  उदासी है जरा उनमें असर ये साफ़ दिखता है  कभी पूछे हज़ारों प्रश्न  जबाबों की झड़ी दी थी  आसुओं के असर उनका  सदा मन तोड़ बैठा था  तलाश है जरा उनमें  असर ये साफ़ दिखता है  उन आखों ने माना है  अर्श तक पहुँचाया है  मेरा है फ़र्ज़ दुनिया में  ख़ुशी का साथ हो मेरा  जो उनमें एक तमन्ना है  असर ये साफ़ दिखता है  मैं तुलना में नहीं कुछ भी  तू ख़ुशी की मेरी कीमत है  मुझे खोना ख़ुशी तेरी  तुझे पाना ख़ुशी मेरा  यही एक द्वन्द चलता है  असर ये साफ़ दिखता है 

ऐ मालिक

बेचैनियां परेशानियां सब  मेरी हों ऐ मालिक मन के द्वंद न हों उसके  जो मेरा है ऐ मालिक रूसबाईयां खामोशियां सब  मेरी हों ऐ मालिक अपनों से न दूर रहे वो  जो मेरा है ऐ मालिक बदहवाशियां बदनामियां सब  मेरी हों ऐ मालिक कोई उससे ना रूठे  जो मेरा है ऐ मालिक लिखना है तो फिर लिख लेना  मेरी जुदाई ऐ मालिक अपनो से वो घिरा रहे  जो मेरा है ऐ मालिक उसके दुख हों सब मेरे सुख मेरे उसको ऐ मालिक सासें मेरी उसको जायें जो मेरा है ऐ मालिक

चलचित्रों का एक सफर

 बेरंग अकेले  तन्हा चले जो डगर  मंजिलों की धूलि नहीं थी कहीं  विश्वासों के सफर मुश्किल तो थे  एक तूने आकर मुझे सम्पूर्ण कर दिया  चलचित्रों का एक सफर भी तय किया  आज केनवॉश पर रंग चढ़ाया है तुमने  लोगों की भीड़ में अकेला था हरदम  एक तुमने आकर हजूम लगा दिया  ये यात्रा है समय का उपयोग कहा  सफर अनेकों तय किये तुमसे  हर सफर पर अकेला था हरदम  हाँ तुमने आकर थाम सा दिया 

साहब हमारे

 साहब हमारे कहते नहीं हैं  सुनते नहीं हैं जताते नहीं हैं  गहराईयों में रखते हैं हमको  जिक़्रों में हमको लाते नहीं हैं  साहब हमारे अमियाँ की बौरें  खेतों की फसलें क्यारी के घोंचें लिपटे से लहलहाते हैं हमको  घरों में हमको सजाते नहीं हैं  साहब हमारे निराले बड़े हैं  दिखते नहीं हैं दिखाते नहीं हैं  सपनों में वो सजोते हैं हमको  तस्वीरों में हमको रखते नहीं हैं  साहब हमारे इमली की चटनी  चूल्हे की रोटी पालक की सब्जी  बाँहों में गुनगुना रखते हैं हमको  दुनियां को दिखते नहीं हैं 

रंग सिन्दूरी

 मैंने संग लिखा था खुशियों का  वो  रंग दे गया  सिन्दूरी  जब हुआ आलिंगन सांसो का एक रिश्ते की फिर नीव गढ़ी मैं चाँद उजाला भर लाया  वो जगमग जीवन करा गया  जब हुआ समर्पण तन मन का  इस सफर की उम्मीद बड़ी  मैं विश्वासों से भरा रहा  वो ओढ़ें लाल चुनर को था  जब हुआ मिलन आशाओं का  इस जीवन को परिभाषा मिली  मैंने सपने देखे कठिन बड़े  वो सपने की ताबीर बना  उसने रंग रचा था संदूरी मैंने रंग भरा है सिन्दूरी 

अथाह प्रेम

 वो कहता है वो साथ मेरे  वो पास मेरे अहसासों में  मिले सफर के मोड आखिरी  मजिल मेरी तुझ तक है  मैं चादर फैलाऊँ जितना  ढांप लूँ तन मन जीवन सब  दूर रहे या पास रहे तु अपनापन बस तुझ तक है  वो कहता है गए ऐसा हो  वो साथ में मेरे चल निकले  राह बनायीं नयी नहीं जो  ख्वाब हमारे तुझतक हैं मैं अथाह प्रेम की सीमा तक  रंग दूँ यह जीवन वृतांत सब  मिल जाये या खो जाये तु  जीवन समर बस तुझ तक है

आलिंगन सिन्दूरी हो

 मैं कह बैठा वो कठिन बात  मन गांठ बैठाये बरसों थी  आ आलिंगन सिन्दूरी हो  मैं बांध लूँ तुझसे मन डोर प्रिये  कब जाने जाती साँस लगे  कब बातें भी दुश्वारी हो  एक तुझमें खो लूँ तन मन सब  मैं थाम लूँ तेरा हाथ प्रिये  परिभाषा कब  गढ़ पाया हूँ  इस रिश्ते की बुनियादों का  एक जोड़ दूँ रिश्ता प्राणों तक  मैं रंग लूँ तेरे रंग प्रिये  कब चाहा सब सम्पूर्ण लगे  कब चाहा जीत लूँ जग सारा  एक टिस सी मन रखनी है  मैं जी लूँ जीवन नाम तेरे 

तु मंजिल है

 मिलना जुलना तो यूँ नहीं होगा  उम्रभर साथ यूँ जरूरी है  मैं नदी हूँ एक बहती सी  तु समुन्दर सा ठहरना तो जरा  बात बातों में बात कब होगी  तेरे कुछ अस्क तो जरूरी हैं मैं आईना हूँ सूनेपन का  तु कभी सज के निखरना तो सही   तु चला आये यूँ समय तो नहीं होगा  खुशबू का वो झौंका  तो जरूरी है मैं तलाश हूँ अधूरे सफरों के  तु मंजिल बनकर मिलना तो सही 

कोई हिकमत है

 हिमालय छूँ के लौटा हूँ  समुन्दर एक सपना है  न बादल थे कभी मेरे  न लहरें साथ मिलनी है  ये तन्हा है सफर लम्बा  तु कुछ पल साथ में रहना  सालों मन में रखा है  जुबान पर लौट आया है  मन का एक निश्चय है  कलम की कोई हिकमत है रुकेगा कुछ समय लम्बा  तु कुछ पल साथ में चलना  आखों में जो हरपल है  सांसे बंद हो तुझपर  जिसे पाकर जमाना  है  जिसे खोकर सिफर जीवन  जमना है तेरे तीरे तु कुछ पल साथ में बहना