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अपूर्णता

 ये अपूर्णता है जीवन की  जो पूर्ण मुझे कर जाती है  सम्पूर्ण समर्पण आकांक्षा वो विश्वास बढ़ा सा जाता है   कुछ मिलता सा कुछ खोता सा  एक द्वन्द सदा से जीता हूँ  सालों के इस जीवन में  ये सार्थक साल समझता हूँ  स्नेह किया परिभाषित है  एक मारे डर के साये हूँ  जो पा सा लिया अमूल्य है  बस अब  खोने से डरता हूँ  एक कविता सा रचता सागर  एक यादों की परिछायी  एक मीरगतृष्णा सी जीवन की  मैं दौड़ लगाए बैठा हूँ  पथिक सदा लक्ष्यों तक कब है  कुछ राह सुहानी होती हैं  कुछ चलता है साथ साथ  कुछ जीवन की तन्हाई है  रे-मन  कहता निर्णय तेरा  साथ चुने या तन्हाई  छोटा सा ये मन हैं मेरा  छोटी तुझसे रुस्वाई  "हो अपूर्णता जीवन की  ये पूर्ण मुझे कर जाती है"  सम्पूर्ण समर्पण आकांक्षा तु विश्वास बढ़ा सा जाता है

सर्वस्व

 कभी समय की बात लिखूंगा  जो मेरा होकर तेरा है  बरसो तेरे संग जिया है  हर ख़ामोशी के लम्हों में  शाम सुबह और रातों दिन  ताँका तुझको झाँका है  तुझसे ज्यादा बार लिखा है  नाम तेरा कोरे कागज़ पर  चलती दुनिया संग तेरे है  मेरी दुनियां तुझ तक है  तुझसे ज्यादा बार रचा है  रूप तुम्हारा इस मन पर  सबके होते द्वन्द समय के  तू दो बातों पर रुक जाता है  मैं तो आखर लिख लिख भरता  खाली कोना इस मन का  होती हैं कुछ बंद खिड़कियां  मैं खुली किताब हूँ जीवन की  नहीं रखे मन रोशन्दा हैं  मैं रात अँधेरा जगता हूँ  गुणा भाग मेरा लक्ष्य नहीं है  सतत राह अजमाती है  मन की तेरे तु जाने साथी ! मेरा सर्वस्व तुम्हारा है  कभी समय की बात लिखूंगा  जो तेरे संग में बहता है  परवाह कहाँ कब कितनी तुझको  समय लिखेगा समयों पर 

तुझ ही तक

 किनारे पर ही चला हूँ हरदम  तटस्थता जीवन सार नहीं है  आर पार का द्वन्द नहीं है  जीवन की ये राह तुझ ही तक   स्नेह  चुना जीवन दर्शन  घृणा जीवन रह न पायी  समर्पण के सब भाव लिए  जीवन की ये राह तुझ ही तक  पाना खोना हिसाब नहीं है  साथ है जो वो जीना है  मंजिल की एक डगर लिए  जीवन की ये राह तुझ ही तक 

मनन

 वो समय भी क्या जो तु न हो  तुझे मन बिठा के काम हों  तु प्रेरणा वजूद की  मनन ये शाम रात हो  कुछ लिख दिया कुछ कह दिया  शरारतों के पार भी  जो कहा नहीं जो लिखा नहीं  मनन ये शाम रात हो कभी हंस लिया कभी सिसकियाँ  अहसास साथ साथ है  उदास पल जो कटा नहीं  मनन ये शाम रात हो कुछ बढ़ गए कुछ चल दिए  सफर में संग संग से  रह जो कटी नहीं  मनन ये शाम रात हो वो जीवन भी क्या जो तु न हो  गुजर गए कुछ साल हों  तु निशानियां सकून की  मनन ये शाम रात हो 

बचपन

 आ चल आ संग मेरे तु बचपन में ले जाऊ तुझको  गायों संग केलि करूं मैं  खेतों की मेढ़ चढ़ाऊँ  पोखर का पानी भर दूँ  नालों में पनही बहा दूँ   चावल की पौध लगा लूँ गेहूँ को फसल मसल दूँ  सरसों की  भरी पितिका फ्योंली के फूल सजा दूँ  ताखे पर 'म्वारी' रख लूँ  पानी के जहाज उड़ा दूँ  तारों की साइकिल लेलूँ गावों में दुकान खोल लूँ मिर्च क्यारियां पानी डालूं  पालक की 'मरास' बोत लूँ  कट्घेलों से लकड़ी लेलूँ  भरी गागरी पानी भर दूँ  चावल कुटुं नाज कूट लूँ  बैलों को गेहूँ में घुमा दूँ  ककड़ी चोर गांव की खा लूँ  बंधी हुई बछिया को खोलूं  बान्दर हाँकूँ चिड़ी पकड़ लूँ  हर नीड का बैजा बदलूँ चुपके कुछ पत्थर रख दूँ  हर दिन उनको बढ़ता पाऊँ माचिस डिबिया भ्रमर बाँध लूँ  'डोकों' को मछली समझ लूँ  पैय्याँ के पेड़ों चढ़कर  फूलों की साख हिला लूँ  सावन के झूलें झू लूँ  पराली की रस्सी बना लूँ  'मोल्यों' की मिठाई परोसों  कच्चे ही पोलम खा जाऊ  फूल बुरांस का रंग बना लूँ  मिट्टी थ...

तस्वीरें

 कुछ तस्वीरें मन में होती  कुछ यूँही खिंच जाती हैं  कुछ रिश्तों की मर्यादा  कुछ अहसास कराती हैं  याद समाये हर पल की  कुछ यादें दे जाती हैं  किसी के नाम किताबें होती  कुछ पन्नों में दब जाती हैं  सपन सजोये हर रिश्ते की  कुछ चुपचाप छुपाई जाती हैं  किसी के नाम पे घर होता है  कुछ घर में सजाई जाती हैं  मधुरम मन की स्मृतियों की  कुछ आगोश समाती हैं  कुछ लगती है अपनी सी  कुछ परायी कर जाती हैं  तस्वीरें हर यादों की  एक कहानी कहती हैं  कुछ मंजिल तक जाती हैं  कुछ राह तांकते रहती हैं 

रंग हूँ

 अहसासों का रंग हूँ दिखता नहीं हूँ  चढ़ता तो हूँ फिर उतरता नहीं हूँ   अहसासों का रंग हूँ सांसों में होता ख्वाबों में होता   विश्वासों का रंग हूँ  यादों में रहता  चढ़ता तो हूँ फिर उतरता नहीं हूँ   अहसासों का रंग हूँ दिखता नहीं हूँ महसूस होता  छपता कहाँ हूँ मिटता नहीं हूँ  चढ़ता तो हूँ फिर उतरता नहीं हूँ   अहसासों का रंग हूँ बसता रहा हूँ सजता रहा हूँ  उकेरा कहाँ हूँ घुल सा गया हूँ  चढ़ता तो हूँ फिर उतरता नहीं हूँ   अहसासों का रंग हूँ

मेरे जीवन सार में

 कभी ये बातें कभी ख़ामोशी  कभी ये गुस्सा कभी वो अपना जैसे तैसे प्यार सीखा गया  मुझको जीवन सार में  रात रात भर तुमको लिखा  सुबह हुआ गुमनाम मैं  कभी समर्पण कभी सादगी  कही पकड़ना कभी छुपाना  जैसे तैसे साथ आ  गया  मेरे जीवन सार में  रात रात भर तुमको लिखा  सुबह हुआ गुमनाम मैं कभी वो नदिया कहीं समुन्दर  कभी प्यास और कभी ये तड़फन  कही वो खुशबू पास बह गयी  मेरे जीवन सार में  रात रात भर तुमको लिखा  सुबह हुआ गुमनाम मैं कभी मनाना कभी रूठना  कभी शिकायत कभी ये शिकवा   कभी पराया कभी वो अपना  आज संदूरी मांग में  रात रात भर तुमको लिखा  सुबह हुआ गुमनाम मैं रोती शाम अधूरी रातें  कभी मनन की मौन ख़ामोशी  सदा मनों की दीवारों को  सजा दिया स्नेह में  रात रात भर तुमको लिखा  सुबह हुआ गुमनाम मैं

नाम तेरे जिंदगी

 हर कदम पर इन्तहां जो ले रही है जिंदगी  हूँ मैं जिद्द पर आजमाले नाम तेरे जिंदगी  हाथ हो महेंदी रची या मांग सिन्दूरी भरी  हर  समर्पण साथ मेरे नाम तेरे जिंदगी  तेरे शब्दों से  सदा घायल हुई है जिंदगी  मान अपनी अब चूका हूँ नाम तेरे जिंदगी  शब्द भेदी बाण हो या तू मुकर जाये कहीं  हर कसम में साथ मेरे नाम तेरे जिंदगी तेरे रुख का कुछ पता चलता नहीं है जिंदगी  हर दिशा ठहरा मिलूंगा नाम तेरे जिंदगी  हूँ मैं सम्मानों में या गिर नज़र जाऊँ कहीं  हर धड़कती साँस मेरी नाम तेरे जिंदगी  जानता जीवन सदा से खाली सी है जिंदगी  अब खड़ा या टूट जाऊँ नाम तेरे जिंदगी  जानता तु न डिगेगा कम नहीं होगा कहीं  प्रीत की सब रीत तुझसे नाम तेरे जिंदगी 

सुन ओ साथी

 सुन ओ साथी साथ तेरा  वक्त की हर मांग मेरी  हर ख़ुशी का साथ तेरा  हर रवानी आस  तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  साँस की हर मांग मेरी हर कदम पर साथ तेरा  हर जवानी प्यास तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  कोने घर के  मांग मेरी  हर समय पर साथ तेरा  हर अर्चना में ज्योत तेरी   सुन ओ साथी साथ तेरा  संघर्ष में है मांग मेरी  हर लक्ष्य माँगा साथ तेरा हर रीत में है प्रीत तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  बीच रखना मांग मेरी  हर प्राण माँगा साथ तेरा  हर दुआ में सोच तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  मेरे जीवन की कहानी  हर छन्द का आनंद तेरा  हर बांसुरी में गीत तेरी  सुन ओ साथी साथ तेरा  मेरे जीवन की निशानी  हर कोशिशों में नाम तेरा हर स्वप्न में तस्वीर तेरी     सुन ओ साथी मर्म तेरा  मेरे जीवन की पहेली  हर सवालों नाम तेरा हर उदीची मान तेरी